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आँखे नीर भरी ..

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कौन जिए रोज ...

Posted On: 5 Apr, 2014 कविता में

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कौन जिए रोज …

कौन जिए रोज तिरी आखों के सहारे

कौन मरे रोज तिरी आँखों के सहारे

कौन वो रोज करे सफर की तैययारी

कौन चले रोज तिरी आखों के सहारे

कौन वो रोज जो मंदिर को जगाए

कौन वो रोज जो अजान लगाये

कौन वो रोज जो गीता में तुझे ढूंढे

कौन वो रोज जो मयखाने से बुलाए

कौन वो रोज जो जिस्म नकारे

कौन वो रोज जो तुझे पुकारे

कौन वो रोज खुद को बिगाड़े

कौन वो रोज जो तुझे संवारे

कौन वो रोज जो तिरा बहाना

कौन वो रोज जो तिरा ठिकाना

कौन वो रोज जो तिरा आंसू

कौन वो रोज तिरा मुस्कराना

कौन वो रोज जो चुप रहता है

कौन वो रोज जो सब कहता है

…..विनय सक्सेना



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