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क्यू कोई तुमसे प्यार करे...

Posted On: 7 Feb, 2014 कविता में

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क्यू कोई तुमसे प्यार करे

हसरतो का क्यू इज़हार करे

तुम रहने वाली सपनों की

कुई क्यू सपना बेकार करे

 

दिल के दर्द की कोई दवा न दे

बीमार को क्यू कोई हवा न दे

फिर क्यू कुई इतने सवाल करे

फिर क्यू कुई इतने बवाल करे

तुम दिल हो दर्द हो या फिर दोनों

कुई दुआओं को क्यू इतना जलाल दे

 

क्यू खुद ही मै एक सवाल हूँ

क्यू खुद ही मै एक जवाब हूँ 

जब तुम न थी तो वो कौन था

गर मै न था तो वो कौन था

वो कौन था जो सब पा गया

वो कौन था जो सब खो गया

 

क्यू हर दिशा सब मौन है

क्यू समय है अब मरा हुआ  

क्यू सफर है वो अब रुका हुआ

क्यू सर है तिरा अब झुका हुआ

क्यू तुझे अब अफ़सोस है

क्यू शब्द हर अब खामोश है

 

क्यू मिरे दर्द का इलाज नहीं

कुई क्यू आदतों से बाज़ नहीं

क्यू हर घडी मिरा इम्तहान है

क्यू मुझपे इतना अहसान है

क्यू कुई इतना पत्थरदिल

क्यू कुई इतन आसान है

 

और अब वक्त मिला है अब वक्त नहीं

क्यू तू तलवारो सा सख्त नहीं

क्यू आंसू तिरे अब औज़ार बने

नज़र कुई क्यू गुनाहगार बने

क्यू अब भी कुई तिरी हार करे 

क्यू तुमसे कुई प्यार करे

 

तुम रहने वाली सपनो की

क्यू कुई सपना बेकार करे

क्यू कुई सपना बेकार करे

 

 

….सपनो में जिंदा सिर्फ एक

….विनय सक्सेना



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kavita1980 के द्वारा
February 12, 2014

इतना क्रोध अच्छा नही विनय जी :)

vinay saxena के द्वारा
February 12, 2014

आदरणीय कविता जी ……. सुझाव सादर स्वीकार ..


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