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आँखे नीर भरी ..

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नींद....

Posted On: 2 Jan, 2014 कविता में

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रातो को अब भी नींद अक्सर आती नहीं

पलकों पे दस्तक देता है कुई अब भी रात गए

 

जिंदगी भी इन सन्नाटो से बोझिल है इतनी

सुनती है कुछ सदाएं अक्सर अब भी रात गए

 

इश्क ओ इबादत सुना है कमज़ोर नहीं होते

ये इंन्सा है जो लडखडाता है अब भी रात गए

 

बस एक दिन सो जाऊंगा मै इत्मीनान से

बालो को प्यार से सहलाता है कुई अब भी रात गए

 

…..विनय सक्सेना



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

meenakshi के द्वारा
January 2, 2014

विनय जी शुक्रिया आपने मेरे ब्लाग में अपने विचार दिये ,इसी से आपका परिचय भी मुझे मिल सका धन्यवाद . ‘नींद’ में आपके ह्रदय की भावनाएं, सुंदर शब्दों के सन्योजन से एक स्पष्ट नज़र आयी हैं ,बहुत-२ शुभकामनाएं ! नव वर्ष मंगलमय हो ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

विनय सक्सेना के द्वारा
January 3, 2014

Thanks Mam…….I reciprocate the best wishes for 2014 to you and your family..vinay


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