रिमझिम फुहार

आँखे नीर भरी ..

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तुम भी मुझे अच्छे नहीं लगते.....

Posted On: 31 Dec, 2013 कविता में

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जब तुम परेशां होते हो

तो मेरे चेहरे की हँसी भी

तुम्हारे चेहरे पे जा के खो जाती है

 

क्यू पता नहीं

तुम परेशां थे

इसलिए

पूछा भी नहीं……

 

और

जब मैं परेशां होती हूँ

तो जाने क्यू

तुम भी मुझे अच्छे नहीं लगते

 

बस तुम्हारे कंधो पे

सर रख के

सोने को जी चाहता है

 

क्यू

पता नहीं

मैं परेशां थी

इसलिए तुमने पूछा भी नहीं……..

  

……….विनय सक्सेना



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ajay Yadav के द्वारा
December 31, 2013

नमस्कार सर , दिल से निकलने वाली एस आवाज को सुक्रिया……………………………………………..बहुत बढ़िया

विनय सक्सेना के द्वारा
December 31, 2013

सादर धन्यवाद अजय भाई….दिल की आवाज को दिल से समझने के लिए…..


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