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हमने दरिया बना डाला....

Posted On: 28 Dec, 2013 कविता में

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तुम अपने हाथो में

दो मुट्ठी बालू लेकर

जिंदगी की डगर पे दौड़ती थी

 

और तेरे पीछे पीछे मै

अंजलि भर पानी लेकर

 

हमने समय के सीने पर

इक दरिया बना डाला था

 ….विनय सक्सेना

कानपुर



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

meenakshi के द्वारा
January 7, 2014

नव वर्ष मंगलमय हो, आप और आपके परिवार में सभी के लिए . वाह ! बहुत सुन्दर भावनाएं अभिव्यक्त की हैं , बहुत -२ बधाई विनय सक्सेना जी ! मीनाक्षी श्रीवास्तव


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