रिमझिम फुहार

आँखे नीर भरी ..

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तुम कितनी खूबसूरत हों

Posted On: 27 Dec, 2013 कविता में

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तुम कितनी खूबसूरत हों

कभी मेरी आँखों से पूछो

पूछना कभी आइने से भी

अगर वो भी तुम्हे मिरी तरह चाहता हों 

 

तेरे सुर्खरू रुखसारों पे

हँसते लबो के किनारों पे

अपनी पलकों के सहारे टिके

उन लम्हों से पूछो जो

तुम्हे मेरी तरह चाहते हैं   

 

पूछो हवा के आँचल से

जो तुम्हे छु के अभी अभी गुजरा है

और चाहे पूछ लो बादल से

जो अभी अभी तुझे देख के भीगा है

और घूमता है गगन में बाँवरा सा

 

और तुम खुद भी जानती हों

और क्यू मै झूठ बोलू भी

तुमने मेरा दिल अख्तियार किया है

क्यू कि मिरी नजरो में

तुम कितनी खूबसूरत हों

कभी मेरी आँखों से पूछो

 

और हाँ

पूछना कभी अपने दिल से भी

क्या वो भी तुझे मेरी नजरो से देखता है

 

 

…विनय सक्सेना

कानपुर



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Santosh Kumar के द्वारा
December 28, 2013

आदरणीय विनय जी ,…सादर प्रणाम खूबसूरत प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति ,…आपके भाव कहते हैं कि उनके भाव निश्चित ही यही होंगे ….प्रेम भाव की अंतर्द्र्ष्टि समान होती है !…..सादर बधाई

विनय सक्सेना के द्वारा
December 28, 2013

आदरणीय संतोष जी धन्यवाद, आपकी हौसला अफजाई के लिए….

abhishek shukla के द्वारा
December 30, 2013

छो हवा के आँचल से जो तुम्हे छु के अभी अभी गुजरा है और चाहे पूछ लो बादल से जो अभी अभी तुझे देख के भीगा है और घूमता है गगन में बाँवरा सा…….खूबसूरत पंक्तियाँ..

abhishek shukla के द्वारा
December 30, 2013

छो हवा के आँचल से जो तुम्हे छु के अभी अभी गुजरा है और चाहे पूछ लो बादल से जो अभी अभी तुझे देख के भीगा है और घूमता है गगन में बाँवरा सा…खूबसूरत

विनय सक्सेना के द्वारा
December 30, 2013

सादर धन्यवाद अभिषेक ……अपने विचारों से इसे पल्लवित करने के लिए

विनय सक्सेना के द्वारा
December 30, 2013

सादर धन्यवाद अभिषेक ….. सिर्फ मोह्हबत ही इक ऐसा विचार है जो बगैर किसी फर्क के हम सबके दिलो में पालता है ……


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